पश्चिम – सफलता, प्रगति एवं यश की दिशा

जीवन में मनुष्य की जब बेसिक जरूरते पूरी हो जाती है तो उसे अच्छे नाम और सफलता की आवश्यकता महसूस होती है. वैदिक वास्तु में पश्चिम दिशा बहुत महत्व रखती है. पश्चिम दिशा व्यापार में सफलता, प्रगति एवं यश की दिशा है. यदि पश्चिम दिशा के शुभ प्रभाव प्राप्त हो तो व्यापार करने वाले लोगो कीनिरंतर प्रगति होगी. पश्चिम दिशा के स्वामी भगवान वरुण है. भगवान वरुण जल के देवता है. जैसा हमे मालूम है की पृथ्वी में लगभग दो-तिहाई जल है. हमारे शारीर में भी लगभग दो-तिहाई मात्रा जल की है. जल हमारे लिए बहुत उपयोगी है. पश्चिम दिशा इसी जल के देवता से सम्बंधित दिशा है अत: यदि पश्चिम दिशा के शुभ प्रभाव प्राप्त हो तो उस व्यापारिक संस्थान को बहुत यश(name and fame) की प्राप्ति होगी. व्यापार में अच्छा नाम सफलता की महत्वपूर्ण सीडी है. अच्छा नाम तथा यश सफलता के लिए अति आवश्यक है. अच्छे नाम से ग्राहक का विश्वास, ग्राहक के विश्वास से ज्यादा बिक्री तथा ज्यादा बिक्री से ज्यादा लाभ एवं अंतत: प्रगति की प्राप्ति होगी. पश्चिम दिशा के शुभ प्रभाव से स्थायित्व तथा बचत भी होती है. यही बचत सही इन्वेस्टमेंट काआकर लेती है, जो जातक को अधिक सम्रधिवान बनाती है.पश्चिम दिशा में व्यापारियों और उद्योगपतियों को अपना ऑफिस बनाना चाहिए. पश्चिम दिशा तथा पश्चिम दिशा के दक्षिण में व्यापारी को बैठना चाहिए. मेनेजर को मालिक के दक्षिण या पश्चिम में बैठना चाहिए. पश्चिम दिशा में पानी की छत पर टंकी भी शुभ होती है.

पृथ्वीअपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व की और घुमती है जिससे जैविक उर्जा पूर्व दिशा से बहती है. यह उर्जा घर, ऑफिस, दुकान, फैक्ट्री, फ्लैट, गोडाउन, इत्यादि के पूर्व दिशा से प्रवेश करती है. इस उर्जा को पश्चिम दिशा से बहार निकलने नहीं देना चाहिए. यदि यह पश्चिम दिशा सेबाहर निकल रही है तो आपकी दूकान, ऑफिस तथा फैक्ट्री में ग्राहकों क ठहराव नहीं होगा, उस सामान (प्रोडक्ट) को यश की प्राप्ति नहीं होगी तथा मार्किट में आपका पैसा रुकने लगेगा. जितनीमेहनत व्यक्तिकरेगाउतना फल उसेप्राप्त नहीं होगा. यदिकिसी के घर में पश्चिम दिशा में कोई वास्तु दोष है तो उस घर में रहने वाले पुरुषो तथा लडको को बीमारी, मूडी होना, चिडचिडा होना, बुरी सांगत में पड़ना या किसी ख़राब लत का कारण बन सकती है.

फेंग शुई में पश्चिम दिशा मेटल तत्व का प्रतिनिधित्व करती है.मेटल तत्व समृधि व ख़ुशी से संभधित है. मेटल तत्व वाले जातक की मानसिक शक्ति प्रबल होती है. उन्हें बिज़नेस तथा पैसे की अच्छी पकड़ होती है. पश्चिम दिशा में फेंग शुई अनुसार शुभ प्रभाव से उस घर में रहने वाले या उस स्थल पर कार्य करने वालो को आर्थिक समृद्धि, विकास एवं सुख की प्राप्ति होती है. पश्चिम दिशा में पौधे, ऊँचे फर्नीचर तथा हरे रंग से रुकवाते पैदा हो सकती है. पश्चिम दिशा में रसोई, बिजलीकामीटर, इन्वर्टर तथा अन्य अग्नि के उपकरणों सेइस दिशा नकारात्मक प्रभाव प्राप्त होंगे.

पश्चिम दिशा के स्वामी ग्रह शनि भगवान भी है.पश्चिम दिशा जन्म पत्रिका के सप्तम भाव से भी सम्बंधित है. जिन लोगो की पत्रिका में शनि ग्रह तथा सप्तम भाव एवं सप्तमेश की स्थिति अच्छी है तथा जिनके घर, दूकान, फैक्ट्री,ऑफिस, इत्यादि में कोई भी वास्तु अथवा फेंग शुई दोष नहीं है उन्हें समृद्धि की प्राप्ति होगी, निरंतर सफलता कामार्ग उनके लिए प्रशस्त होगा और वे यश की प्राप्ति करेंगे. ऐसे घर में रहने वाले बच्चे भी पढाई-लिखाई में नाम कमाएंगे एवं अपने माता-पिता के आज्ञाकारी होंगे. जिन लोगो की पत्रिका में शनि ग्रह की स्थिति अशुभ है जैसे शनि ग्रह एवं सप्तमेश पत्रिका में नीच राशि, शत्रु राशि, मृत या बाल अवस्था के हो, अस्त हो अथवा पाप प्रभावों में हो तथा जिनके घर, दूकान, फैक्ट्री,ऑफिस, इत्यादि में वास्तु अथवा फेंग शुई दोषहो तो उन्हें निरंतरअसफलता और बदनामी मिलेगी. ग्राहक उनके यहाँ आकर भी वस्तु नहीं खरीदेंगे. घर में मानसिक क्लैश की रहेगा एवं परिवार के सदस्यों में निरंतर विरोधाभास रहेगा.ऐसे घर में रहने वाले बच्चे भी शरारतीएवं पढाई में अच्छे नहीं होंगे. यदिघर के सदस्यों की पत्रिकाओमें शनि ग्रह एवं सप्तमेश की स्थिति अच्छी हो किन्तु पशिम दिशा में वास्तु एवं फेंग शुई दोष हो या ठीक इसके विपरीत पशिम दिशा में वास्तु एवं फेंग शुई दोष न हो किन्तुघर के सदस्यों की पत्रिकाओमें शनि ग्रह एवं सप्तमेश की स्थिति ख़राब हो तो दोनों स्थिति में मिश्रित प्रभाव प्राप्त होंगे.
इस आर्टिकल के लेखक भारत के सबसे बड़े वैदिक ज्योतिष, वैदिक वास्तु, अंक शास्त्र, हस्त रेखा, टैरो कार्ड रीडिंग, कृष्णामूर्ति पद्धति ज्योतिष, फेंग शुई, रत्न एवं क्रिस्टल चिकित्सा सिखाने वाले संस्थान के फाउंडर डायरेक्टर श्री आशीष पाटीदार है. सन२००१ में उन्होंनेनौकरी छोड़कर इंस्टिट्यूट ऑफ़ वैदिक एस्ट्रोलॉजी की स्थापना की जोभारत तथा विदेशो में वैदिक विधाओ क प्रशिक्षण एवं कंसल्टेशन प्रदान कर रहा है. श्री आशीष के भारत के २१ राज्योव अनेक देशो में वैदिक वास्तु, वैदिक ज्योतिष, फेंग शुई एवं अंक शास्त्र के प्रोजेक्ट चल रहे है जिससे सेकड़ो उद्योगपति,व्यापारी, घर-परिवार लाभान्वित हुए है. उन्होंने वैदिक ज्योतिष, वैदिक वास्तु, फेंग शुई तथा फेस रीडिंग पर ३० किताबे भी लिखी है जो इंस्टिट्यूट ऑफ़ वैदिक एस्ट्रोलॉजी के पाठ्यक्रम में शामिल है.

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