सावधानी और सफलतापूर्वक रत्नों का ज्योतिष में उपयोग-

IM-04

रत्न क्या है –

रत्नों की परिभाषा करते हुए संसार के लगभग सभी विद्वानों ज्योतिषियों और वैज्ञानिकों ने इस तथ्य को स्वीकार किया है, कि रत्नों से एक विशेष प्रकार की प्रकाश रश्मि या अर्थात ज्योति किरणें निकलती रहती हैं, उनके रत्न विकिरण से उस प्रकाश का भले ही अनुभव में ना आए परन्तु स्पर्श मानव जीवन को और जीव जगत को प्रभावित करता है यह तथ्य ठीक वैसा ही है जैसा ग्रहों और तारों से निकलकर आने वाली किरणों के स्पर्श का प्रभाव का होता है। विस्तार से विवेचना करके भौतिक विशेषज्ञों अंतरिक्ष मर्मज्ञ और ज्योतिषियों ने निष्कर्ष रूप में यह सिद्धांत दिया कि आकाश में स्थित प्रत्येक ग्रह से साम्य रखने वाला पृथ्वी पर भी एक पत्थर ऐसा है जो उस ग्रह का पूरक कहा जा सकता है। इन पत्थरों को रत्न की संज्ञा दी गई। सूर्य का माणिक, चंद्रमा का मोती, मंगल का मूंगा, बुध का पन्ना, गुरु का पुखराज, शुक्र का हीरा, शनि का नीलम, राहु का गोमेद और केतु का लहसुनिया -यह रचना और गुणों में ग्रहों के ही समान होते हैं।

सावधानीपूर्वक रत्न का धातु चुनाव –

कोई भी रत्न किसी भी धातु में जड़वा कर पहन लिया जाए, यह उचित नहीं है। अनेक वर्षों तक परीक्षणों द्वारा स्वयं को आश्वस्त कर लेने के बाद शोधकर्ता मनीषियों ने बताया कि समुचित और त्वरित लाभ के लिए धारक को चाहिए कि वह अपने रत्न को इसके लिए उपयुक्त धातु में जड़वा कर ही धारण करें। इस प्रकार लॉकेट या अंगूठी जो कुछ भी बनवाना हो उसे निम्नलिखित विवरण के आधार पर ही बनवाना चाहिए –

माणिक स्वर्ण धातु में

मोती चांदी में

मूंगा सोने में

पन्ना का सोने में

पुखराज चांदी में

हीरा अष्टधातु में

नीलम अष्टधातु में या चांदी में

गोमेद पंचधातु में

लहसुनिया पंचधातु में

इस वर्गीकरण में मतभेद भी हैं बहुत से लोग संपन्नता की झोंक में चांदी या मिश्रित धातु में लेकर सोना ही धारण करते हैं परंतु यह अनुभव सिद्ध है, कि हीरा और मोती सोने में जड़वा कर पहनने पर अनुकूल लाभ नहीं देते। इस विषय पर अंतिम निर्णय के लिए ज्योतिषी को अपनी कुंडली दिखाकर अन्य ग्रहों की स्थिति का विवेचन कर लेना चाहिए।

सावधानीपूर्वक रत्नों के क्रम का चुनाव –

कुछ लोग शौकिया और कुछ लोग ग्रही प्रभाव से लाभ उठाने के लिए नवरत्नों की अंगूठी अथवा लॉकेट धारण करते हैं। ऐसी स्थिति में रत्न जडाते समय उनके क्रम पर ध्यान देना चाहिए। क्रम विरुद्ध रत्न हानिकारक हो जाते हैं। नवरत्नों को अपने धारणीय आभूषण लॉकेट या अंगूठी में इस क्रम से चढ़ाना चाहिए।

-प्रथम पंक्ति में पन्ना हीरा और मोती

-दूसरी पंक्ति में पुखराज, माणिक और मूंगा

-तीसरी पंक्ति में नीलम और गोमेद

इस क्रम से स्पष्ट ज्ञात होता है कि प्रथम पंक्ति में बुध, शुक्र, चंद्रमा और दूसरी पंक्ति में गुरु, सूर्य ,मंगल और तीसरी पंक्ति में केतु, शनि और राहु ग्रहों की उपस्थिति मानकर उनसे संबंधित रत्न जड़े जाते हैं।

निश्चित वजन के अनुसार रत्न पहने –

नवरत्न जड़ित आभूषण या अंगूठी तभी लाभकारी होती है ,जब उस में नियमानुसार वांछित भार के या वजन के रत्न लगाए गए हो| कहीं बार कोई लॉकेट और अंगूठा ऐसी होती है, जो नवरत्नों से अलंकृत होने के बावजूद समुचित वजन की ना होने पर या उनमें समुचित वजन के रत्न ना होने के कारण वे सर्वथा प्रभावहीन होती है। कुछ लोग केवल रत्नों का होना ही पर्याप्त मानते हैं, परंतु ऐसा नहीं है रत्नों का वजन में होना या पर्याप्त वजन में होना विशेषकर महत्व रखता है।

रत्नों की मैत्री या शत्रुता को ध्यान रखकर रत्न पहने-

एक जैसे स्वभाव रूचि वाले व्यक्ति परस्पर मिलकर आनंदित होते हैं, और इसके विपरीत जो बिना विचारधाराओं प्रकृति स्वभाव वाले व्यक्ति जब परस्पर मिलते हैं तो विरोध, कलह और संहार की स्थिति उत्पन्न होती है| यह  नियम जड़ चेतन सब पर लागू है। रत्नों पर भी यही नियम लागू है। सब परस्पर मिलकर एक जैसा प्रभाव नहीं देते| उनमें भी अनुकूलन, प्रतिकूलन, समर्थन, विरोध, मित्रता और शत्रुता होती है। प्रथम धारक के लिए यह बहुत ही आवश्यक संकेत है, कि वह भूल कर भी दो परस्पर विरोधी रत्न धारण ना करें अन्यथा वह किसी दुर्घटना, संकट, शारीरिक, मानसिक, आर्थिक क्षेत्र से पीड़ित हो सकता है। ग्रहों की भांति उनसे संबंधित रत्न भी अपने प्रभाव में भिन्नता रखते हैं। अनुकूल ग्रहों के रत्न एकत्र होकर शुभ प्रभाव की व्रद्धि करते हैं, परंतु विरोधी प्रकृति वाले ग्रहों के रत्न उपद्रवकारी  होते हैं, अतः रत्न धारण करते समय शत्रुता और मैत्री को ध्यान रखकर रखना पहनने चाहिए।

इसी तरह के अन्य रत्नो के बारे में जानने के लिए आप हमारे संसथान इंस्टिट्यूट ऑफ़ वैदिक एस्ट्रोलॉजी से जेम्स एंड क्रिस्टलथेरेपी में पत्राचार द्वारा अध्यन कर सकते है।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s